सफलता के पाच सूत्र

सफलता के पाच सूत्र

सफलता के पाच सूत्र

सफलता के पाच सूत्र

दोस्तों क्या आप जानते है सफलता अलग अलग लोगो के लिए अलग – 2 तरीके से परिभाषित होती है लेकिन आज के समय में सफलता को केवल अच्छी नौकरी सरकारी नौकरी व बहतर भविष्य को लेकर दी जाती है लेकिन मेरे अनुसार “सफलता जीवन जीने की कला है “ जिनके पास ये आ जाती है उन्हें फिर न तो अच्छी नौकरी और नहीं सरकारी नौकरी की आवश्यकता होती है क्योकि वे लोग प्रत्येक परिस्थिति को जीना जानते है वो हर परिस्थिति को समझते है

में यहाँ आपको” सफलता के वे पाच सूत्र “ बताने जा रहा हु जिनको अपना कर आप सफलता की हर उचाई को छु सकगे

और आप जानते है सक्सेस सभी चाहते हैं, लेकिन यह सबको मिलती कहां है? कई बार तो यह अच्छी एजुकेशन और पर्याप्त मेहनत के बाद भी नहीं मिलती। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि लोग अपने लिए गलत दिशा चुन लेते हैं। और जब तक उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है, तब तक काफी देर हो जाती है और वे अपने कैरियर की रेस में पीछेरह  जाते हैं। इस सिचुएशन से बचने के लिए अपना गोल डिसाइड करने से लेकर सक्सेस मिलने तक हर कदम पर अपने दिमाग का पूरा उपयोग करें। जाने सफलता के पाच सूत्र और अपनी जिन्दगी में अपनाकर हाशिल करे हर सफलता को  :

 

सूत्र 1 :- लक्ष्य का निर्धारण

 

क्या आप जानते है की सुबह सुबह जब आप सब्जी लेनी निकलते है तो सब्जी वाले की दुकान पर ही क्यों पहुचते है पान वाले की पर क्यों नहीं पता है क्यों क्योकि आप ये जानते है की आप कहा जा रहे है और अगर आप को ये ही नहीं पता होगा की जाना कहा है तो आप कहा जायेगे कोई नहीं बता सकता है

अगर सफल लोगो की बात करे तो पता है वो ये बात अच्छी तरह से जानते थे और जानते है की उन्हें कहा जाना है यानी की सबसे पहेले उन्होंने अपना लक्ष्य निर्धारित किया और फिर उस दिशा में अपना काम करना शुरु किया
आप भी इस फार्मूले को अपना सकते हैं। अपना गोल, अपनी स्ट्रैंथ, इंट्रेस्ट और प्रॉयरिटी के बेस पर तय करें। हम यह काम कर सकते हैं? हमारी रुचि इसमें है या नहीं? हमारी प्रॉयरिटी में इसका क्रम क्या है? ये सब अपने आप से पहले ही जन ले और  जो जवाब आए, उसके आधार पर ही अपना टारगेट डिसाइड करें। हा लक्ष्य न तो अधिक बड़ा होना चाहिए और नहीं बहुत ही आसन होना चाहिए | पहले छोटे 2 लक्ष्य बनाये और उन्हें हासिल करे और फिर बड़ा लक्ष्य निर्धारित करे |

 

सूत्र 2 :- लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते का निर्धारण

 

लक्ष्य का निर्धारण करने के बाद सेकंड स्टेप में उसे हासिल करने के लिए उस रास्ते का निर्धारण करना होता है जिसपर चल कर हम अपना लक्ष्य प्राप्त करेगे | और आपका यही रास्ता आपको  सक्सेस तक पहुंचना है। लक्ष्य निर्धारण करते समय अपनी क्षमता  को ज्यादा या कम नहींआंकना चाहिए। आपका यह रास्ते का निर्धारण आपकी वास्तविक क्षमतायो पर आधारित होना चाहिए  तभी अच्छा रिजल्ट मिलेगा। लक्ष्य निर्धारण करने में आप किसी एक्सपर्ट या सीनियर की हेल्प ले सकें, तो रिजल्ट और भी अच्छा मिल सकता है। ध्यान रखें कि हमे उसी रास्ते का चुनाव करना चाहिए जिस पर हम चल सके मेरा मतलब है की आप को अपनी शारीरिक व बोद्धिक क्षमता को ध्यान में रख कर लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते का निर्धारण करना चहिये  । इसे समझने के लिए हम एक example लेते है माना आपका बोद्धिक स्तर आपको मैथ की पढाई की अनुमति नहीं देता है मेरा मतलब की आपके बहुत प्रयासों के बाद भी आप मैथ के आसान सवालो को हल नहीं कर पाते है तो आपका मैथ से जुड़े कार्रिअर के बारे में सोचना गलत हो सकता है इसलिए इस प्वॉइंट पर हम जितनी ईमानदारी बरतेंगे, सफलता की मंजिल उतनी ही करीब आती जाएगी।

सूत्र 3  :- रास्ते में आने वाली रूकावटो का पता लगाये और कमियों को दूर करे

टारगेट डिसाइड करने और काम करने के तरीके का निर्धारण करने  के बाद अब अपनी उन कमियों को दूर करने की कोशिश करें, जो सक्सेस में बाधा बन सकती हैं। समझदारी से काम लेते हुए अपने वीक प्वॉइंट्स पहचानें। फ्रेंड्स, गार्जियन या टीचर की मदद लें, जिनसे आपको अपनी कमियां जानने में मदद मिलेगी। अपने आप के बारे में सोचे और पता लगाये की आप क्या कर सकते है और कैसे कर सकते है और अगर नहीं हो रहा है तो पता लगाये की ये काम क्यों नहीं हो रहा है क्योकि केवल आप ही हो जो खुद को सबसे अच्छी तरह से जानते है और पता लगाये  कि क्या ये कमियां हमारी सक्सेस में बाधा बन सकती हैं? अगर आंसर हां हो, तो काम करने के तरीके  में थोडा बदलाव करते हुए पहली प्रॉयरिटी इन वीक प्वॉइन्ट्स को दूर करने की बनाएं।

 

सूत्र 4  :- पता लगाये की क्या आप सही जा रहे है

 

स्टेप-बाय-स्टेप स्ट्रैटेजी डेवलप करने के बाद अब मंजिल की तरफ कदम रखें। फाइनल गोल के लिए हम जो तैयारी कर रहे हैं, क्या वह सही दिशा में चल भी रही है या नहीं? यह भी पता  करना जरूरी है। अगर हमें यही नहीं पता होगा, तो मुमकिन है कि आखिरी पलों में हमारी रफ्तार कम हो जाए। इससे बचने के लिए एक निश्चित समय के बाद अपनी तैयारी को खुद या किसी सीनियर से टेस्ट कराएं। इससे पता चल जाएगा कि फाइनल स्टेज तक पहुंचने के लिए कितना एफर्ट लगाए जाने की जरूरत है। और अगर आप कोई कमी पाते है तो उसका निवारण समय रहते ही कर पायेगे इसलिए यह बहुत जरुरी है की आप को पता होना चाहिए की क्या आप सही दिशा में जा रहे है या नहीं

 

सूत्र 5  :- कमियों और गलतियों को कभी भी इगनोरे का करे

 

जब आप अपना वर्क जज करना शुरू करेंगे, तो बहुत सी गलतियां आपके सामने आने लगेंगी। इन मिस्टेक्स को नजरअंदाज न करें। गलतियों को इग्नोर करना सबसे बडी मिस्टेक है। मिस्टेक्स क्यों हो रही हैं, इस पर ध्यान दें और पूरे प्रिपरेशन के साथ इन्हें दूर करें। क्योकि इंसान या तो दूसरो के अनुभवों से सिकते है या फिर गलतियों से

आप अगर पूरी ईमानदारी से इस दिशा में मेहनत के साथ काम करेंगे, तो सफलता ज्यादा दिनों तक आपसे दूर नहीं रह सकती है। सबसे पहले हो रही बडी मिस्टेक्स को दूर करें क्योंकि अगर ये ठीक हो गई, तो छोटी मिस्टेक तो खुद ब खुद दूर हो जाएंगी। और हा छोटी 2 सफलताओ से कभी भी संतुष्ट न हो और अपना प्रयास कम न करे , जब तक फाइनल गोल न मिल जाए।

 

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लेखक :- यतेन्द्र सिंह

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3 Comments

  1. RAHUL KANNAUJIA
    October 1, 2016
  2. Satyam
    October 2, 2016
  3. MANMOHAN SINGH
    November 20, 2016

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